Report

पश्चिम बंगाल में 4 महीनों में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की 60 घटनाएं: India Hate Lab की रिपोर्ट

Spread the love

पश्चिम बंगाल में मई से सितंबर 2026 के बीच ईसाइयों को निशाना बनाकर हिंसा और उत्पीड़न की कम से कम 60 घटनाएं सामने आई हैं। यह दावा India Hate Lab (IHL) की 22 सितंबर को जारी रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटनाएं राज्य के 13 जिलों में दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, 13 मई से 20 सितंबर के बीच 52 मामले प्रार्थना सभाओं, घरों, चर्चों और अन्य ईसाई सभाओं पर छापे या कथित हस्तक्षेप से जुड़े थे। इसके अलावा आठ मामलों में मारपीट, भीड़ की हिंसा या तोड़फोड़ की घटनाएं दर्ज की गईं। इसी अवधि में ईसाइयों को निशाना बनाकर दिए गए पांच कथित नफरत भरे भाषण और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर तीन विरोध प्रदर्शन भी दर्ज किए गए।

IHL का कहना है कि इन घटनाओं में हिंदू जागरण मंच, विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल, हिंदू सुरक्षा समिति, हिंदू एकता मंच और हिंदू संहति जैसे संगठनों के सदस्यों के शामिल होने की बात सामने आई है। दक्षिण 24 परगना और पश्चिम मेदिनीपुर में ईसाई प्रार्थना सभाओं पर 13-13 छापे दर्ज किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, कई घटनाओं में हिंदू संगठनों के लोग प्रार्थना सभाओं या घरों में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से धर्म को लेकर पूछताछ की। कुछ मामलों में उनसे आधार कार्ड दिखाने को भी कहा गया। इन कार्रवाइयों के पीछे कथित धार्मिक धर्मांतरण का आरोप लगाया गया।

रिपोर्ट में ईसाई महिलाओं के साथ कथित उत्पीड़न का भी जिक्र है। कुछ घटनाओं में महिलाओं से शंखा-पोला और सिंदूर पहनने को लेकर सवाल किए गए और इन्हें हटाने का दबाव बनाए जाने का आरोप है। 19 सितंबर को बैरकपुर में कुछ ईसाई महिलाओं के साथ मारपीट और सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने की घटना भी रिपोर्ट में दर्ज है।

IHL के मुताबिक, कुछ मामले मारपीट और तोड़फोड़ तक भी पहुंचे। दक्षिण 24 परगना में एक चर्च में तोड़फोड़, सुभाषग्राम में निर्माणाधीन चर्च पर हमला और क्रॉस तोड़े जाने तथा कुछ अन्य जगहों पर बाइबल फाड़ने जैसी घटनाओं का रिपोर्ट में उल्लेख है। 25 अगस्त को हावड़ा में धर्मांतरण में मदद करने के आरोप में दो लोगों को भीड़ द्वारा पकड़े जाने और उनके साथ मारपीट किए जाने का भी दावा किया गया है।

पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

रिपोर्ट में कुछ घटनाओं के दौरान पुलिस की मौजूदगी और बाद में ईसाइयों को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख है। IHL के अनुसार, कई मामलों में हिंदू संगठनों द्वारा पकड़े गए लोगों को पुलिस के हवाले किया गया और उनके खिलाफ धर्मांतरण के आरोपों की जांच शुरू की गई।

रिपोर्ट में सोशल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। IHL का कहना है कि उसके द्वारा दर्ज की गई घटनाओं के वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साझा किए गए। कई मामलों में संबंधित संगठनों के सदस्यों ने खुद छापेमारी, पूछताछ और टकराव के वीडियो पोस्ट किए या उन्हें लाइव किया।

IHL के अनुसार, इन घटनाओं की शुरुआत मई में हुई और सितंबर में इनमें तेजी देखी गई। 19 और 20 सितंबर के सिर्फ 48 घंटों में पांच छापे दर्ज किए गए।

Related Posts

No Content Available

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *