IndiaPoliticsReport

राजस्थान SIR: 1.82 लाख मतदाताओं को मृत बताया, पंचायत वोटर लिस्ट में नाम मिले

The Reporters’ Collective की पड़ताल में राजस्थान SIR के दौरान मृत बताकर हटाए गए 1,82,440 मतदाताओं के नाम पंचायत वोटर लिस्ट में भी मिले। उदयपुर की सीमा देवी और अजमेर की 26 वर्षीय शालू डोलिया के मामले भी सामने आए।

राजस्थान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान चुनाव आयोग की ओर से मृत बताकर हटाए गए 1,82,440 मतदाताओं के नाम राज्य निर्वाचन आयोग की पंचायत मतदाता सूची में दर्ज मिले हैं।

The Reporters’ Collective की एक पड़ताल में दोनों सरकारी सूचियों का मिलान करने पर यह विसंगति सामने आई। रिपोर्ट में उदयपुर की सीमा देवी और अजमेर की 26 वर्षीय शालू डोलिया के मामले भी शामिल हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की सूची में मृत बताया गया, जबकि पंचायत मतदाता सूची में उनके नाम मतदाता के तौर पर मौजूद हैं।

यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग (ECI) तैयार करता है, जबकि पंचायत और नगर निकाय चुनावों की मतदाता सूची राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के जिम्मे है। दोनों सूचियों में एक ही व्यक्ति की स्थिति अलग-अलग दर्ज होने से मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

सीमा देवी और शालू डोलिया को मृत बताया

The Reporters’ Collective के मुताबिक, उदयपुर के मालवी विधानसभा क्षेत्र की सीमा देवी का नाम ECI के रिकॉर्ड में मृत मतदाता के तौर पर दर्ज है, लेकिन पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में उनका नाम मौजूद है। इसी तरह अजमेर के किशनगढ़ क्षेत्र की 26 वर्षीय शालू डोलिया को भी ECI की अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट (ASDD) सूची में मृत बताया गया, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की पंचायत सूची में उनका नाम पात्र मतदाता के रूप में दर्ज मिला।

दोनों महिलाओं के मामले इस बड़े अंतर को समझने के लिए अहम उदाहरण हैं। एक सरकारी चुनावी सूची में मृत दर्ज व्यक्ति का नाम दूसरी सरकारी सूची में मतदाता के रूप में मौजूद है। ऐसे मामलों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मृत घोषित करने से पहले किस तरह का सत्यापन किया गया और अगर किसी जीवित व्यक्ति का नाम गलती से हट गया है तो उसे बहाल करने की प्रक्रिया क्या है।

कैसे सामने आए 1,82,440 नाम?

रिपोर्ट के अनुसार, The Reporters’ Collective ने ECI की ASDD सूची में दर्ज मतदाता पहचान संख्या यानी EPIC नंबरों का राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की पंचायत मतदाता सूची से मिलान किया। इस प्रक्रिया में 1,82,440 ऐसे नाम मिले जिन्हें ECI ने मृत बताया था, लेकिन वे पंचायत मतदाता सूची में दर्ज थे। पड़ताल में कुछ नामों को राज्य निर्वाचन आयोग के अलग सत्यापन पोर्टल पर भी जांचा गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि गढ़ी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे सबसे अधिक 4,889 नाम मिले, जबकि सिरोही में यह संख्या 4,624 थी। ये आंकड़े दोनों सरकारी डेटाबेस के बीच दर्ज अंतर को दिखाते हैं। हालांकि, रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सभी 1,82,440 लोगों का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। इसलिए इस संख्या को उन सभी लोगों के जीवित होने की स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

राजस्थान SIR में 8.75 लाख को मृत श्रेणी में रखा गया

राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की 16 दिसंबर 2025 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, SIR की गणना प्रक्रिया के दौरान 8.75 लाख मतदाताओं को मृत श्रेणी में दर्ज किया गया था। यह आंकड़ा उस चरण की आधिकारिक जानकारी है। The Reporters’ Collective की पड़ताल में सामने आए 1,82,440 नाम इसी मृत श्रेणी से जुड़े वे रिकॉर्ड हैं, जो पंचायत मतदाता सूची में भी मौजूद मिले।

इस तरह 1.82 लाख और 8.75 लाख दो अलग-अलग आंकड़े हैं। 8.75 लाख उन मतदाताओं की संख्या है जिन्हें SIR के दौरान मृत श्रेणी में रखा गया, जबकि 1,82,440 उन नामों की संख्या है जिनका पंचायत मतदाता सूची से मिलान करने पर दोनों रिकॉर्ड में मौजूद होना पाया गया।

चुनाव आयोग से जवाब और दोबारा जांच की मांग

The Reporters’ Collective ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसने इस विसंगति को लेकर भारत निर्वाचन आयोग और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल पूछे थे, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक दोनों की ओर से जवाब नहीं मिला था। पड़ताल में संपर्क किए गए बूथ लेवल अधिकारियों में से एक ने टिप्पणी करने से इनकार किया, जबकि दो अधिकारियों ने ऐसी गड़बड़ी होने से इनकार किया।

अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दोनों मतदाता सूचियों में इतना बड़ा अंतर क्यों है। क्या 1,82,440 रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराई जाएगी? जिन मतदाताओं को गलत तरीके से मृत दर्ज कर दिया गया है, उनके नाम विधानसभा और लोकसभा चुनावों की मतदाता सूची में किस तरह बहाल होंगे? और इस प्रक्रिया में हुई गलती की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

मतदाता सूची में नाम होना नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। किसी व्यक्ति को एक सरकारी सूची में मृत और दूसरी में पात्र मतदाता दर्ज किए जाने जैसी विसंगति की पारदर्शी जांच जरूरी है।

यह रिपोर्ट The Reporters’ Collective की पड़ताल और राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। The Reporters’ Collective की मूल पड़ताल पढ़ें।

Related Posts

मुंबई की छात्रा मयास्सराह बुखारी ने AI प्रोजेक्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता तीसरा पुरस्कार।

मुंबई के बेगम शरीफा कलसेकर गर्ल्स इंग्लिश हाई स्कूल की छात्रा मयास्सराह बुखारी…

1 of 41

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *