उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में सरकारी प्राथमिक विद्यालय की छत के पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन की चपेट में आने से 12 वर्षीय छात्र अरशद अहमद की मौत हो गई। घटना 2 नवंबर को गड़वार थाना क्षेत्र के कनैला गांव स्थित नवीन पोखरा प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बलिया के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
NHRC की 5 नवंबर की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अरशद चौथी कक्षा का छात्र था। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि मध्याह्न भोजन के लिए लौकी तोड़ने के लिए उसे स्कूल की रसोई की छत पर भेजा गया था। इसी दौरान वह छत के पास से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में आ गया। आयोग ने कहा है कि खबर में सामने आए तथ्य सही पाए जाने पर यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय कुमार, सहायक शिक्षक अनिल कुमार और शिक्षामित्र दीपचंद को गिरफ्तार किया था। बेसिक शिक्षा विभाग ने दो शिक्षकों को निलंबित किया और शिक्षामित्र की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की। परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
घटना के बाद ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। स्कूल की छत के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। NHRC ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। अब आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्कूल परिसर में बिजली लाइन की स्थिति, सुरक्षा इंतजाम और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने के संबंध में अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं।












