नई दिल्ली: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर निर्धारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसका 11 मार्च 2026 का फैसला मूल मामले के पक्षकारों तक सीमित रहेगा। अदालत ने कहा कि इस फैसले के आधार पर पहले से पूरी हो चुकी नियुक्तियों, पदोन्नतियों या सेवा आवंटन को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
द ट्रिब्यून और लाइव लॉ की 6 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से दायर स्पष्टीकरण याचिका पर यह बात कही। अदालत ने मार्च के फैसले में बदलाव करने से इनकार किया, लेकिन उसके दायरे को स्पष्ट किया।
मार्च के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी कंपनियों में काम करने वाले माता-पिता की केवल वेतन आय के आधार पर OBC उम्मीदवार का क्रीमी लेयर दर्जा तय नहीं किया जा सकता। माता-पिता के पद और सेवा की स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।
शुक्रवार के स्पष्टीकरण में अदालत ने कहा कि यह फैसला उन पक्षकारों पर लागू होगा जो मूल कार्यवाही में शामिल थे। लंबित मामलों का फैसला संबंधित अदालतें उनके तथ्यों और पात्रता के आधार पर करेंगी। पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रिया, नियुक्ति या सेवा आवंटन को फिर से शुरू करने का कोई सामान्य निर्देश नहीं दिया गया है।
इस स्पष्टीकरण से उन उम्मीदवारों को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है जिनकी नियुक्ति या सेवा आवंटन पहले ही पूरा हो चुका है। अदालत ने फैसले के अनुपालन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय भी दिया है।











