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जामिया में छात्र संघ चुनाव की तारीख जारी होने तक जारी रहेगी भूख हड़ताल, छात्रों ने प्रशासन के नोटिस खारिज किए।

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी दो नोटिसों को खारिज कर दिया है। छात्रों का कहना है कि इन नोटिसों में उनकी तीन प्रमुख मांगों का समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने साफ किया है कि जब तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) के चुनाव की अधिसूचना और तारीखों का कार्यक्रम जारी नहीं किया जाता, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी।

छात्रों की भूख हड़ताल 12 अक्टूबर से चल रही है। 21 अक्टूबर को यह दसवें दिन में पहुंच गई। छात्र प्रतिनिधियों ने 20 अक्टूबर को विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय समिति के साथ हुई बैठक के बाद अपनी मांगों को लेकर यह बयान जारी किया।

छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग

छात्रों की पहली मांग छात्र संघ चुनाव 2026-27 की अधिसूचना जारी कर दो दिनों के भीतर चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित करने की थी। छात्रों के मुताबिक, जामिया में 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं।

छात्रों ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 दिसंबर 2022 को एक मामले का निपटारा कर दिया था और अब चुनाव कराने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। उन्होंने जामिया अधिनियम, 1988 की धाराओं 23(j) और 23(k) का भी हवाला दिया।

छात्र प्रतिनिधियों के मुताबिक, बैठक में उन्होंने अध्यक्ष के आधार पर चुनाव कराने का सुझाव दिया था और समिति ने इसे कुलपति के सामने रखने का आश्वासन दिया था। लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में 20 दिसंबर 2026 तक छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक नई समिति बनाने की बात कही गई है। छात्रों का आरोप है कि इस समिति में कोई छात्र प्रतिनिधि शामिल नहीं है और चुनाव की तारीख भी घोषित नहीं की गई है। उन्होंने इसे चुनाव टालने की कोशिश बताया है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग

छात्रों की दूसरी मांग विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी अनुशासनात्मक मामलों को लिखित रूप से वापस लेने, लंबित कार्यवाही बंद करने और भविष्य में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की थी।

छात्रों का कहना है कि मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय के नोटिस में कार्रवाई वापस लेने के बजाय उसकी समीक्षा करने की बात कही गई है। इसके लिए छात्रों को व्यक्तिगत रूप से मुख्य प्रॉक्टर के पास जाने को कहा गया है।

छात्र प्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि समीक्षा और कार्रवाई वापस लेना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोटिस में चेतावनी दी गई है कि 21 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे के बाद होने वाली किसी भी घटना पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को लेकर ऐसी चेतावनी देना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता का हवाला दिया।

मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को हटाने की मांग

छात्रों की तीसरी मांग मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को उनके पदों से हटाने की है। छात्रों ने आरोप लगाया कि 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:30 बजे छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की गई थी और इससे पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं।

छात्र प्रतिनिधियों के मुताबिक, उच्चस्तरीय समिति के साथ बैठक में सुरक्षा सलाहकार पर कार्रवाई की बात हुई, लेकिन छात्रों ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी। उनका कहना है कि प्रशासन के दोनों नोटिसों में इस मांग का कोई जिक्र नहीं है।

छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि विरोध प्रदर्शन से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों की समीक्षा उसी मुख्य प्रॉक्टर के कार्यालय को सौंपी गई है, जिसे वे पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

कुलपति के सामने रखीं चार मांगें

छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति से चार मांगें पूरी करने की अपील की है। इनमें छात्र संघ चुनाव 2026-27 की अधिसूचना और तारीखों का कार्यक्रम तत्काल जारी करना, विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी अनुशासनात्मक मामलों को वापस लेना, मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को हटाना तथा भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

छात्रों ने मांग की है कि भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जाए, एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध हो और उन्हें किसी तरह की धमकी या दबाव का सामना न करना पड़े।

छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि उच्चस्तरीय समिति ने उनकी मांगें सुनी थीं और भूख हड़ताल खत्म करने या स्थगित करने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, प्रशासन के ताजा नोटिसों से स्पष्ट है कि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

छात्रों ने दोहराया कि उनका विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है और छात्र संघ चुनाव की अधिसूचना तथा कार्यक्रम जारी होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।

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