दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस पर छात्रों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। संगठनों ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
छात्र संगठनों की ओर से जारी बयान में कॉमरेड निरंजन समेत तीन छात्रों की गिरफ्तारी की निंदा की गई है। बयान के मुताबिक, इन छात्रों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत गिरफ्तार किया गया है। संगठनों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा गार्ड और सुरक्षा सलाहकार छात्रों को विश्वविद्यालय के गेट पर पुलिस के हवाले कर रहे हैं, जिसके बाद उन्हें कथित तौर पर मनमाने आरोपों में हिरासत में लिया जा रहा है।
बयान में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय में अचानक ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं और पुस्तकालय समेत अन्य सुविधाएं बंद कर दी गई हैं। छात्र संगठनों के अनुसार, इससे खासकर छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की जा रही है और छात्राओं को घसीटा जा रहा है। बयान में मुख्य प्रॉक्टर, रजिस्ट्रार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) और कुछ प्रोफेसरों पर भी छात्रों के साथ कथित शारीरिक दुर्व्यवहार में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।
छात्र संगठनों ने कहा कि कई सप्ताह से आंदोलन कर रहे छात्रों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने लोगों से प्रदर्शनकारी छात्रों तक भोजन, स्वच्छ पेयजल और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचाने की अपील की है, ताकि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रख सकें।
बयान में आंदोलन को दबाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा गया कि छात्र अपनी मांगों पर कायम हैं। उनकी प्रमुख मांगों में जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ की तत्काल बहाली और मुख्य प्रॉक्टर तथा सुरक्षा सलाहकार का इस्तीफा शामिल है।












