नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्रों का धरना और भूख हड़ताल 13वें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार को जारी प्रेस बयान में छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में दो दशक से अधिक समय से छात्र संघ नहीं है। छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली की मांग कर रहे हैं। छात्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से गठित हाई लेवल कमेटी (HLC) की प्रतिक्रिया अधूरी और देरी से आई है। उन्होंने प्रशासन पर कुछ मामलों में भ्रामक जानकारी देने का भी आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें दोहराई हैं। इनमें छात्र संघ चुनाव की अधिसूचना तत्काल जारी करना, चुनाव की निश्चित तारीख और संविधान तैयार करने की समयसीमा तय करना शामिल है। इसके अलावा, प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने और भविष्य में आंदोलन में शामिल होने के कारण किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गई है। छात्रों ने मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को हटाने या उनके इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।
संविधान मसौदा समिति के गठन से संतुष्ट नहीं छात्र
छात्रों ने कहा कि प्रशासन ने ‘JMI-SU Constitution Draft Committee’ के गठन की अधिसूचना को इस तरह पेश किया है, जैसे इससे छात्र संघ की बहाली की मांग पूरी हो गई हो। हालांकि, छात्रों के मुताबिक, संविधान तैयार करने के लिए समिति का गठन उनकी मांगों का केवल एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समिति के गठन के साथ चुनाव की समयसीमा और निश्चित तारीख भी घोषित की जानी चाहिए।
प्रेस बयान में छात्रों ने कहा कि हाई लेवल कमेटी ने भी स्वीकार किया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम की धारा 23(J) और 23(K) से जुड़ी व्यवस्था दो दशक से अधिक समय से निष्क्रिय है। छात्रों ने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक चुनाव नहीं होने की स्थिति को अब और देरी का आधार नहीं बनाया जा सकता।
छात्रों ने कहा कि समयसीमा के बिना किसी समिति का गठन ठोस प्रतिबद्धता नहीं है। उन्होंने नियमित छात्र संघ चुनाव को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने को लेकर लिंगदोह समिति की सिफारिशें और सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट हैं।
अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि उनकी मांग कार्रवाई की समीक्षा करने की नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह वापस लेने की है। उनके मुताबिक, हाई लेवल कमेटी की अधिसूचना में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई की समीक्षा करने के लिए कहा गया है और छात्रों को राहत मांगने की छूट दी गई है।
छात्रों का कहना है कि इससे उन विद्यार्थियों पर ही राहत हासिल करने की जिम्मेदारी डाल दी गई है, जिनके खिलाफ अपनी आवाज उठाने के कारण कार्रवाई की गई। उन्होंने सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को बिना किसी शर्त वापस लेने की मांग की।
17 अक्टूबर की घटना को लेकर मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार पर सवाल
छात्रों ने मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को हटाने या उनके इस्तीफे की मांग के समर्थन में 17 अक्टूबर की घटना का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे, जब प्रदर्शनकारी सो रहे थे, तब प्रशासन ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाने की कोशिश की।
छात्रों ने हाई लेवल कमेटी के उस निष्कर्ष को खारिज किया, जिसमें जानबूझकर या योजनाबद्ध तरीके से अनुचित व्यवहार किए जाने की घटना से इनकार किया गया और छात्रों की शिकायतों को ‘तनाव के क्षणों में पैदा हुई आपसी तनातनी’ के तौर पर देखा गया।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों, जिनमें भूख हड़ताल करने वाले छात्र भी शामिल थे, को तड़के हटाने की कोशिश को सामान्य तनातनी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने इस घटना के लिए मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को जिम्मेदार ठहराया। छात्रों ने कहा कि सुरक्षा कर्मचारियों के लिए आचार संहिता और संवेदनशीलता प्रशिक्षण की व्यवस्था शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती।
परिसर में लिखे नारों को लेकर भी दी प्रतिक्रिया
जारी किये गए बयान में छात्रों ने कहा कि कुछ नारों का हवाला देकर उनके आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र संघ की बहाली से जुड़ी उनकी मांगों को मीडिया और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नजरअंदाज किया जा रहा है।
छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन परिसर में लोकतंत्र की बहाली और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए है। उन्होंने आंदोलन को बदनाम करने के किसी भी प्रयास को खारिज करते हुए कहा कि यह संघर्ष सभी के लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में है।
जामिया समुदाय से आंदोलन के समर्थन की अपील
छात्रों के अनुसार, हाई लेवल कमेटी ने शिक्षकों, कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों और अन्य लोगों से प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए छात्रों को समझाने की अपील की है। इसके जवाब में प्रदर्शनकारी छात्रों ने जामिया समुदाय से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर गर्व करने वाला विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक आवाज से वंचित नहीं कर सकता। छात्रों ने बातचीत के लिए तैयार रहने की बात कही, लेकिन स्पष्ट किया कि संवाद का नतीजा ठोस, लिखित और समयबद्ध प्रतिबद्धताओं के रूप में सामने आना चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने दोहराया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी।












