नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच तमिलनाडु की डिंडीगुल लोकसभा सीट से सांसद आर. सचितानंदम ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। 20 अक्टूबर 2026 को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने छात्र संघ चुनाव बहाल करने के लिए समयबद्ध योजना बनाने, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने और छात्रों की शिकायतों का समाधान करने की अपील की है।
सांसद ने अपने पत्र में कहा कि जामिया में आखिरी छात्र संघ चुनाव 2006 में हुए थे। इसके बाद से विश्वविद्यालय में छात्रों के सामूहिक हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित छात्र संघ नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित छात्र संघ न केवल छात्रों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने के लिए जरूरी है, बल्कि इससे विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों और विश्वविद्यालय की गतिविधियों में भागीदारी को भी बढ़ावा मिलता है।
छात्रों की समस्याओं का किया उल्लेख
पत्र में सांसद ने जामिया के विद्यार्थियों से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र किया। इनमें कक्षाओं और छात्रावासों में सुविधाओं की कमी, उपस्थिति संबंधी नीतियां, शोधार्थियों की छात्रवृत्ति जारी होने में देरी और फीस, छात्रवृत्ति, बुनियादी ढांचे तथा शैक्षणिक नियमों से जुड़े फैसलों में छात्रों की भागीदारी का अभाव शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों को अपनी बात रखने और विश्वविद्यालय के निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व पाने का अवसर मिलना चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों को हटाए जाने का भी जिक्र
सांसद ने पत्र में बताया कि छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने भूख हड़ताल शुरू की है, जो 20 अक्टूबर को नौवें दिन में प्रवेश कर गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों पर बातचीत करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन दमनात्मक कदम उठा रहा है।

पत्र के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 5:30 बजे विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मचारियों और सादे कपड़ों में मौजूद अन्य लोगों ने गेट नंबर 7 के पास गुलिस्ताने-ए-गालिब क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कथित तौर पर जबरन हटाकर परिसर से बाहर कर दिया। सांसद ने यह भी कहा कि इसके बाद बिना पूर्व सूचना के गेट बंद कर दिए गए, जिससे छात्रों को कक्षाओं, पुस्तकालय और रीडिंग रूम तक पहुंचने में परेशानी हुई।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई छात्रों की लोकतांत्रिक मांगों के समाधान में मदद करने के बजाय उनके और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा सकती है।
छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग
आर. सचितानंदम ने अपने पत्र में छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़े दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने 2006 की लिंगदोह समिति की सिफारिशों और 2013 के यूजीसी छात्र अधिकार संबंधी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि छात्र प्रतिनिधित्व, संगठन बनाने और विश्वविद्यालय के निर्णयों में भागीदारी के अवसर महत्वपूर्ण हैं।
सांसद ने कुलपति से प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच रचनात्मक संवाद शुरू कराने तथा निर्वाचित छात्र संघ की बहाली के लिए समयबद्ध कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी मांग की कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
पत्र के अंत में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने और उनकी शिकायतों का जल्द समाधान करने की अपील की, ताकि जामिया में लोकतांत्रिक और समावेशी शैक्षणिक वातावरण कायम रह सके।












