हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 100 पूर्व छात्रों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बरता, गैरकानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की निंदा की है। 12 अक्टूबर को जारी बयान में उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत और सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की पॉलिसी प्रमुख मेहर पसरीचा के साथ एकजुटता जताई।
यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किए गए थे। बयान के अनुसार, हार्वर्ड लॉ स्कूल के 2009 बैच के पूर्व छात्र शादान फरासत को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की। वह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी की कथित गैरकानूनी हिरासत रोकने के लिए पहुंचे थे।
बयान में कहा गया, “हम सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता, गैरकानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की कड़ी निंदा करते हैं।”
हस्ताक्षरकर्ताओं ने दिल्ली में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कथित अभूतपूर्व घेराबंदी तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मनमानी और असंवैधानिक कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई।
मेहर पसरीचा को 13 घंटे तक हिरासत में रखने का आरोप
बयान में CJP की पॉलिसी प्रमुख मेहर पसरीचा की हिरासत का भी जिक्र किया गया है। हार्वर्ड केनेडी स्कूल से 2025 में स्नातक पसरीचा के बारे में कहा गया कि वह किसी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थीं, बल्कि लक्ष्मी नगर मार्केट में शांतिपूर्वक नाश्ता कर रही थीं, तभी उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
हस्ताक्षरकर्ताओं के मुताबिक, पसरीचा को 13 घंटे तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें कोई कागजी दस्तावेज नहीं दिया गया तथा हिरासत में लेने का कारण भी नहीं बताया गया।
बयान में कहा गया, “अगर वकीलों को कानूनी सहायता देने से रोका जाता है, तो कानून-व्यवस्था की पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।”
सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग
हार्वर्ड से जुड़े हस्ताक्षरकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कथित गैरकानूनी हिरासत और उससे जुड़ी हिंसा से प्रभावित लोगों की मदद करने वालों की भी सराहना की।
बयान में सरकार और कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियों से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन तुरंत रोकने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकारों का सम्मान करने तथा दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
इस बयान पर हार्वर्ड लॉ स्कूल, हार्वर्ड केनेडी स्कूल, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल और हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों से जुड़े 100 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।












