हैदराबाद: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर में मस्जिद गिराए जाने के विरोध में रविवार को मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) में विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का आयोजन MANUU Students Collective की ओर से किया गया।
प्रदर्शन की शुरुआत MCJ विभाग के मुदस्सिर अंसारी ने की। उन्होंने कहा कि सरकार मस्जिदों, मदरसों और पहचान पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले नए नहीं हैं, बल्कि बाबरी मस्जिद के समय से ही यह सिलसिला जारी है।
इसके बाद MCA विभाग के छात्र इमरान हुसैन ने कहा कि मस्जिद का ध्वस्तीकरण महज एक घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह हमारी पहचान पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों के मन और दिल को कमजोर करना चाहती है और उन्हें मानसिक गुलामी की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है।
MSW विभाग के इब्राहिम जुनैदी ने धार्मिक संगठनों से इस मामले में आगे आने और सरकार के सामने अपनी मांगें रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश अब न्यायिक प्रक्रिया के बिना की जाने वाली ऐसी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
इसके बाद उर्दू विभाग के रिसर्च स्कॉलर सालेह अंसारी ने सहारनपुर मस्जिद (Saharanpur Mosque) के ध्वस्तीकरण को BJP और RSS के एजेंडे का हिस्सा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि BJP और RSS ने देश को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है।
सालेह अंसारी ने छात्रों से पढ़ाई करने के साथ-साथ सवाल करना सीखने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों को खुद को ऐसे सम्मानित नागरिक के रूप में तैयार करना चाहिए, जो सच को सच और झूठ को झूठ कह सकें।
कार्यक्रम का संचालन उबैदुल्लाह फलाही ने किया। अंत में शेख मुदस्सिर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।












