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जामिया के J&K गर्ल्स हॉस्टल में खराब भोजन को लेकर प्रदर्शन, प्रॉक्टोरियल टीम पर बदसलूकी का आरोप।

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नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जम्मू-कश्मीर गर्ल्स हॉस्टल में मेस के खाने की गुणवत्ता और कथित अस्वच्छता को लेकर छात्राओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्राओं का आरोप है कि खाने में कीड़े, कांच के टुकड़े और अन्य बाहरी सामग्री मिलने की शिकायतों के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

छात्राओं के मुताबिक, 10 सितंबर की रात उन्होंने मेस की व्यवस्था के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान मोहसिन सर और राजन पटेल ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जबकि प्रोवोस्ट निकहत मंजूर ने भी मांगों से जुड़े ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, छात्राओं का कहना है कि 11 सितंबर तक स्थिति में कोई स्पष्ट सुधार नहीं हुआ।

एक छात्रा ने बताया, “हमें 14 घंटे से ज्यादा यहां बैठे हुए हो गए हैं। रात में भी हम बैठे थे, तब लाइट बंद कर दी गई थी। अभी भी लाइट बंद करके कूलर हटा दिए गए हैं। कोई हमसे बात करने नहीं आ रहा है। दो लड़कियां बीमार हैं। प्रोवोस्ट बात करने नहीं आ रही हैं। हम धूप में बैठे हैं, लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।”

छात्राओं ने 11 सितंबर को कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर को लिखित आवेदन देकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने प्रोवोस्ट निकहत मंजूर और रेजिडेंट वार्डन इरा निसार के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई की मांग के साथ ज्ञापन में दर्ज मांगों को तत्काल लागू करने की अपील की।

छात्राओं का यह भी आरोप है कि खराब खाने की वजह से कई छात्राएं बीमार पड़ रही हैं, जबकि हॉस्टल फीस में हर सेमेस्टर बढ़ोतरी की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लंबे समय से जामशेद अली ही मेस के कॉन्ट्रैक्टर बने हुए हैं, जबकि खाने की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रॉक्टोरियल टीम पर छात्राओं के साथ कथित धक्का-मुक्की और उनके फोन छीनने की कोशिश करने के आरोप भी लगाए गए हैं। एक छात्र संगठन ने सहायक प्रॉक्टर पर छात्रों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस आरोप से इनकार किया है।

द हिंदू के मुताबिक़, विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया है कि सहायक प्रॉक्टर द्वारा छात्रों के साथ मारपीट किए जाने का आरोप सही नहीं है। प्रशासन ने पूरे मामले पर अपने पक्ष में आरोपों का खंडन किया है।

छात्राओं ने प्रशासन से स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान करने के साथ शिकायत करने वाले छात्रों को किसी भी तरह के धमकी, उत्पीड़न या प्रतिशोध से सुरक्षा देने का लिखित आश्वासन मांगा है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आवेदन की औपचारिक प्राप्ति स्वीकार करने और मामले पर जल्द लिखित जवाब देने की भी मांग की है।

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