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बरेली: ‘सर तन से जुदा’ की तुलना ‘जय श्री राम’ से नहीं हो सकती, इलाहाबाद HC ने मौलाना तौकीर रज़ा खान की जमानत खारिज की।

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Maulana Tauqeer Raza Khan News: बरेली हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रज़ा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने अपने आदेश में ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे को गंभीर मानते हुए कहा कि इसकी तुलना ‘जय श्री राम’, ‘अल्लाहु अकबर’, ‘सत श्री अकाल’ या ‘हर हर महादेव’ जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती।

अदालत के मुताबिक धार्मिक नारे जहां आस्था और धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति हो सकते हैं, वहीं ‘सर तन से जुदा’ जैसा नारा हिंसा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाला माना जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं की आड़ में हिंसा के लिए उकसाने वाले नारों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

हालांकि, मौलाना तौकीर रज़ा की ओर से अदालत में लगाए गए आरोपों का विरोध किया गया और मामले में उनकी भूमिका तथा आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा गया। उनकी ओर से जमानत की मांग करते हुए अदालत से राहत देने का अनुरोध किया गया था, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद आरोपों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

यह मामला 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है, जिसमें मौलाना तौकीर रज़ा को आरोपी बनाया गया था। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद उन्हें फिलहाल जमानत नहीं मिल सकी है।

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