India

CBSE ने 12वीं के रिजल्ट के बाद छात्रों से वसूले ₹16.47 करोड़: RTI रिपोर्ट में दावा.

Spread the love

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के रिजल्ट के बाद री-चेकिंग और अन्य पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं के जरिए छात्रों से ₹16.47 करोड़ की फीस वसूली। यह दावा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के आधार पर हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस रकम में स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के अनुरोधों से प्राप्त ₹11.37 करोड़ (अनऑडिटेड) भी शामिल हैं।

दरअसल, CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था। इस व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा गया। हालांकि, रिजल्ट जारी होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने कम अंक मिलने और मूल्यांकन में गड़बड़ियों की शिकायत की थी। इसके बाद OSM सिस्टम की पारदर्शिता, तकनीकी खामियों और इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठे।

CBSE ने 12वीं का रिजल्ट 13 मई 2026 को घोषित किया था। इस साल कुल पास प्रतिशत 85.20% रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत कम था। रिजल्ट के बाद कई छात्रों ने अपने अंकों पर असंतोष जताते हुए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी।

OSM सिस्टम पर उठे थे कई सवाल

ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू होने के बाद छात्रों और अन्य पक्षों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तरह की गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। इनमें उत्तर पुस्तिकाओं की हैंडराइटिंग और अदला-बदली, कुछ सवालों की जांच किए बिना छोड़ देना, सही उत्तरों के अंक नहीं देना और कॉपियों की धुंधली या अधूरी स्कैनिंग जैसी शिकायतें शामिल थीं।

इसके अलावा, OSM सिस्टम के लिए स्कैनिंग और मूल्यांकन का काम करने वाली कंपनी ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ (Coempt Eduteck) को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप था कि कंपनी को टेंडर प्रक्रिया और उसकी ब्लैकलिस्टिंग से जुड़े विवादों के बावजूद काम दिया गया। वहीं, कुछ एथिकल हैकर्स ने OSM पोर्टल की सुरक्षा में खामियां होने का दावा किया था, जिससे डेटा और उत्तर पुस्तिकाओं तक अनधिकृत पहुंच की आशंका जताई गई थी।

शुरुआत में CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि OSM का उद्देश्य मैन्युअल गलतियों को कम करना, मूल्यांकन में पारदर्शिता लाना और जल्द रिजल्ट जारी करना है। हालांकि, बाद में संसदीय समिति की आपत्तियों, अदालतों में दायर याचिकाओं और तकनीकी जांच के बीच इस सिस्टम की खामियों को लेकर सवाल और गंभीर हो गए। आरोप यह भी लगे कि करीब 18 लाख छात्रों से जुड़ी इतनी बड़ी व्यवस्था को बिना पायलट प्रोजेक्ट और पर्याप्त स्ट्रेस टेस्ट के लागू किया गया था।

री-चेकिंग के लिए छात्रों से ली गई थी फीस

विवाद के बाद CBSE ने छात्रों को तीन तरह की पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं का विकल्प दिया था। इनमें उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करना, अंकों का सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) शामिल था। शुरुआत में स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका के लिए प्रति विषय ₹700, अंकों के सत्यापन के लिए ₹500 और पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न ₹100 फीस निर्धारित की गई थी।

छात्रों के विरोध के बाद बोर्ड ने फीस में कटौती की। इसके तहत स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका की फीस ₹700 से घटाकर ₹100 प्रति विषय, अंकों के सत्यापन की फीस ₹500 से घटाकर ₹100 और पुनर्मूल्यांकन की फीस ₹100 से घटाकर ₹25 प्रति प्रश्न कर दी गई।

छात्रों को 19 से 26 मई तक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के लिए आवेदन करने का मौका दिया गया था। वहीं, अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल 1 से 7 जून तक खुला था। CBSE ने यह भी कहा था कि यदि किसी छात्र की आपत्ति सही पाई जाती है और पुनर्मूल्यांकन के बाद उसका एक अंक भी बढ़ता है, तो संबंधित प्रक्रिया की पूरी फीस वापस कर दी जाएगी।

₹3.57 करोड़ की फीस वापस की गई

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, CBSE ने RTI के जवाब में बताया कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जिन छात्रों के अंक बढ़े, उन्हें कुल ₹3.57 करोड़ (अनऑडिटेड) वापस किए गए। यह तीनों पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं से प्राप्त कुल ₹16.47 करोड़ का करीब 21.68 प्रतिशत है।

हालांकि, बोर्ड ने यह जानकारी नहीं दी कि कितने छात्रों को फीस वापस की गई। इसके अलावा, तीनों सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले अलग-अलग छात्रों की कुल संख्या और विषयवार अंकों में हुए बदलाव का विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया।

1.27 लाख से अधिक आवेदन, 3.87 लाख कॉपियों की मांग

CBSE के 28 सितंबर को दिए गए RTI जवाब के मुताबिक, 20 मई 2026 को शाम 7:30 बजे तक बोर्ड को कुल 1,27,146 आवेदन मिले थे। इन आवेदनों में छात्रों ने स्कैन की गई 3,87,399 उत्तर पुस्तिकाओं की मांग की थी।

बोर्ड ने यह भी बताया कि 26 मई को शाम 6 बजे तक कुल 11,37,560 उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके छात्रों को भेजा जा चुका था। यह संख्या शुरुआती आवेदनों में मांगी गई उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या से करीब तीन गुना अधिक थी।

वेंडर को भुगतान के लिए नहीं मिला स्वीकृति आदेश

RTI के जवाब में एक और अहम जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, CBSE के वित्त विभाग ने बताया कि उसे 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करने के लिए अपने OSM वेंडर कोएम्प्ट एडुटेक को भुगतान करने संबंधी कोई स्वीकृति आदेश नहीं मिला था। वित्त विभाग ने यह भी कहा कि उसके पास कंपनी पर लगाए गए जुर्माने से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

इससे OSM सिस्टम के संचालन, वेंडर को दिए गए काम और वित्तीय प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, उपलब्ध RTI जानकारी में इन मामलों पर बोर्ड की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

Related Posts

SIR पर Human Rights Watch की रिपोर्ट: 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा, महिलाओं और मुस्लिमों पर असमान असर का आरोप

रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को मनमाना और पारदर्शिता से…

जामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग पर प्रदर्शन जारी, छात्र संगठनों ने प्रशासन और पुलिस पर दमन का आरोप लगाया।

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर जारी…

जामिया में छात्र संघ चुनाव की तारीख जारी होने तक जारी रहेगी भूख हड़ताल, छात्रों ने प्रशासन के नोटिस खारिज किए।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर…

1 of 35

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *