नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों की कथित अवैध हिरासत और CCTV फुटेज गायब होने के मामले में पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने चारों याचिकाकर्ताओं को कुल ₹65 हजार मुआवजा देने का आदेश दिया है। लाइव लॉ के मुताबिक, यह रकम संबंधित SHO के वेतन से वसूल की जाएगी।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने सुनवाई के दौरान CCTV खराब होने और 13 से 23 अप्रैल 2026 के बीच की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने को लेकर SHO और देवरिया के SP से सवाल किए।
लाइव लॉ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जस्टिस श्रीधरन ने पुलिस अधिकारियों की दलीलों पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से उन्हें “झूठों का झुंड” कहा। कोर्ट ने पूछा कि अगर CCTV 14 अप्रैल से काम कर रहा था तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है। SHO ने बताया कि CCTV सिस्टम 12 अप्रैल को खराब हो गया था, लेकिन इसकी मरम्मत से जुड़ी कोई GD एंट्री नहीं की गई थी।
SP ने कोर्ट को बताया कि उन्हें CCTV खराब होने की जानकारी नहीं थी। जब SP ने कोर्ट से माफी मांगी तो जस्टिस श्रीधरन ने कहा, “कोर्ट से माफी मत मांगिए, लोगों से माफी मांगिए।”
लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि SHO को निलंबित या बर्खास्त क्यों नहीं किया गया। SP ने बताया कि SHO को क्राइम ब्रांच भेज दिया गया है, लेकिन कोर्ट इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ।
चारों को अलग-अलग मुआवजा
कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता नंबर 2, 3 और 4 को ₹20-20 हजार और याचिकाकर्ता नंबर 1 को ₹5 हजार देने का निर्देश दिया। कुल ₹65 हजार की रकम SHO के वेतन से वसूल की जाएगी।
कोर्ट ने CCTV सिस्टम के लिए जारी ₹46.46 लाख की राशि को लेकर भी सवाल उठाए। लाइव लॉ के मुताबिक, पीठ ने पूछा कि जब काम पूरा नहीं हुआ था तो पूरी रकम एजेंसी को क्यों जारी की गई।












