सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी जिम ट्रेनर दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक [Mohammad Deepak] को बड़ी राहत दी है। अदालत ने बजरंग दल के कट्टरपंथियों की शिकायत पर उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर से शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही, उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी गई है, जिसमें दीपक को मामले के संबंध में सोशल मीडिया पर बोलने से प्रतिबंधित किया गया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दीपक कुमार (Deepak Kumar) की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया। दीपक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखा।
हाई कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
दीपक कुमार ने अपनी याचिका में उत्तराखंड हाई कोर्ट के मार्च 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द करने से इनकार करते हुए पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि इस मामले में नोटिस जारी किया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित एफआईआर से जुड़ी सभी कार्यवाहियां अगली सुनवाई तक स्थगित रहेंगी।
जनवरी में हुआ था विवाद
यह मामला 26 जनवरी 2026 को कोटद्वार में हुई एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि बजरंग दल से जुड़े कुछ कट्टरपंथी एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार पर उसकी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने का दबाव बना रहे थे। कट्टरपंथियों का दावा था कि यह शब्द कोटद्वार स्थित सिद्धपीठ हनुमान मंदिर से जुड़ा है।
दीपक कुमार ने दुकानदार के समर्थन में कट्टरपंथियों का विरोध किया था। जब उनसे उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया था।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की शिकायत के आधार पर दीपक कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 191(1), 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में उन पर चोट पहुंचाने, दंगा करने, आपराधिक धमकी देने और शांति भंग करने के आरोप लगाए गए थे।
दीपक ने 31 जनवरी को हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने मार्च में एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लग गई है।












