नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) से 67.23 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। यह ग्रांट पांच साल की अवधि के लिए मंजूर की गई है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत DHR की मानव संसाधन विकास (HRD) योजना के “सपोर्ट टू इंस्टीट्यूशंस एंड साइंटिफिक प्रोफेशनल्स/बॉडीज/एसोसिएशंस” घटक के तहत यह राशि मंजूर की गई है।
जामिया की ओर से “मॉलिक्यूलर एंड मल्टी-ओमिक्स अप्रोचेस इन एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR): डायग्नोस्टिक्स टू थेराप्यूटिक्स” शीर्षक से प्रस्ताव दिया गया था। इस कार्यक्रम के तहत AMR डायग्नोस्टिक्स, मल्टी-ओमिक्स तकनीकों और इलाज की नई रणनीतियों से जुड़े क्षेत्रों में विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर जामिया के सेंटर फॉर इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इन बेसिक साइंसेज (CIRBSc) की प्रोफेसर डॉ. शमा परवीन हैं। प्रोजेक्ट में प्रो. इम्तियाज़ हसन, प्रो. आसिमुल इस्लाम, प्रो. एस. एन. काज़िम और प्रो. राजन पटेल को-इन्वेस्टिगेटर हैं।
जामिया के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य AMR के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना और बायोमेडिकल रिसर्च व वैज्ञानिक क्षमता को मजबूत करना है। ट्रेनिंग में मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, कंप्यूटेशनल तरीके और ड्रग डिस्कवरी जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।
जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने इस उपलब्धि के लिए प्रो. शमा परवीन और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने AMR के क्षेत्र में रिसर्च और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में इस पहल को महत्वपूर्ण बताया।
विश्व स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रही है। ऐसे में जामिया को मिली यह ग्रांट AMR रिसर्च, इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग और बायोमेडिकल साइंस के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।












