इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के एक सरकारी स्कूल में छात्रों से कथित तौर पर इस्लामिक प्रार्थना कराने और मुस्लिम समुदाय से जुड़े होने का संकेत देने वाली पोशाक पहनाने के आरोप में निलंबित शिक्षक मोहम्मद अंजर अहमद को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने विभागीय जांच पूरी होने तक उनके निलंबन आदेश को प्रभावी न रखने का निर्देश दिया है।
जस्टिस मंजू रानी चौहान ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की इस स्तर पर जांच नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक अपनी मेडिकल लीव और अन्य दस्तावेजों को विभागीय जांच के दौरान अपने बचाव के तौर पर पेश कर सकते हैं और उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
मामले में शिक्षक को 10 मई 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल के आदेश से निलंबित किया गया था। आरोप था कि जब वह स्कूल में प्रभारी प्रधानाध्यापक थे, उस दौरान छात्र इस्लामिक प्रार्थना करते थे और ऐसी यूनिफॉर्म पहनते थे, जिससे उनके एक विशेष समुदाय से होने का संकेत मिलता था।
शिक्षक की ओर से अदालत में दलील दी गई कि संबंधित अवधि में वह अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें मेडिकल लीव स्वीकृत थी। उन्होंने दावा किया कि जब छात्रों की कथित प्रार्थना और पोशाक से जुड़ी गतिविधियां हुईं, तब वह स्कूल में मौजूद नहीं थे। वहीं, बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से अदालत को बताया गया कि 3 सितंबर 2026 को शिक्षक को आरोप-पत्र (चार्जशीट) दिया गया है और रिकॉर्ड में 14 नवंबर 2025 से पहले उन्हें कथित प्रार्थना के दौरान मौजूद दिखाए जाने की बात दर्ज है।
हाईकोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया कि शिक्षक के खिलाफ शुरू की गई जांच को कानून के अनुसार जल्द से जल्द पूरा किया जाए, और अधिमानतः 15 दिनों के भीतर जांच पूरी की जाए। अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने तक 10 मई का निलंबन आदेश स्थगित रहेगा और उसका अंतिम प्रभाव विभागीय जांच के परिणाम पर निर्भर करेगा।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को शिक्षक को सभी प्रासंगिक दस्तावेज तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।












