जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने देश में न्याय, समानता और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंसाफ के दोहरे पैमाने हमेशा तबाही का रास्ता खोलते हैं। सरकारें डर, जुल्म और भेदभाव से नहीं, बल्कि न्याय, समानता और जनता के विश्वास के आधार पर चलती और तरक्की करती हैं।
अरशद मदनी ने कहा कि सांप्रदायिकता और धर्म के आधार पर नफरत को बढ़ावा देना किसी भी देश के लिए बेहद खतरनाक है। इससे न केवल सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है, बल्कि अमन, तरक्की और राष्ट्रीय एकता को भी नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने मौजूदा हालात को लेकर निराश न होने की अपील करते हुए कहा कि परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। उनके मुताबिक, हर रात के बाद सुबह आती है और वह दिन भी आएगा जब अमन, भाईचारे, प्रेम और न्याय का सूरज उगेगा तथा नफरत, भेदभाव और सांप्रदायिकता का अंधेरा छंटेगा।
मौलाना मदनी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जुल्म और नाइंसाफी कभी स्थायी नहीं रहे। जब जुल्म अपनी इंतिहा पर पहुंचता है तो इंसाफ की सुबह करीब आती है। उन्होंने कहा कि एक दिन जुल्म और जबरदस्ती का अंत होगा और देश फिर प्रेम, भाईचारे, न्याय, समानता और इंसानियत के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, “हम एक जिंदा कौम हैं और जिंदा कौमें हालात के रहमो-करम पर नहीं रहतीं, बल्कि अपने चरित्र, हौसले और अमल से हालात का रुख बदल देती हैं।”












