ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की पराक्रम की जानकारी मीडिया को देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह को बड़ी राहत मिली है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राज्य कैबिनेट के उस प्रस्ताव पर हरी झंडी दे दी है, जिसमें उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति न देने की सिफारिश की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद मई 2025 का है। 11 मई 2025 को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके बयान में आतंकवादियों और एक समुदाय की महिलाओं को लेकर विवादास्पद संदर्भ था, जिसे व्यापक विरोध मिला।
इस टिप्पणी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया। SIT ने जांच पूरी कर सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी और विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति (prosecution sanction) मांगी।
25 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति न देने का प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि SIT ने जांच पूरी कर ली है और अब अभियोजन स्वीकृति का फैसला राज्यपाल के स्तर पर लंबित है। इसके ठीक बाद, 1 सितंबर की रात राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसका सीधा असर यह हुआ कि विजय शाह के खिलाफ फिलहाल मुकदमा नहीं चलेगा।
कांग्रेस का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ने SIT की सिफारिश के बावजूद मंत्री को बचाने के लिए अभियोजन स्वीकृति से इनकार किया। कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर प्रस्ताव पर पुनर्विचार की गुजारिश भी की।
वहीं, भाजपा और राज्य सरकार का रुख है कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत तय हुआ है और कैबिनेट ने विधि के अनुसार निर्णय लिया है।
आगे क्या होगा?
अभियोजन स्वीकृति न मिलने के बाद SIT को सुप्रीम कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट या चार्जशीट दाखिल करने से पहले इस निर्णय का हवाला देना होगा। अदालत अब इस पर आगे की कार्रवाई तय करेगी, चाहे वह मामले को बंद करना हो या अन्य कानूनी रास्ते अपनाना।












