नई दिल्ली: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर इलाके में प्रशासन ने बुधवार सुबह भारी पुलिस बल के साथ जामिया हनफिया रज़ाउल उलूम मदरसे को सील कर दिया। एसडीएम रिचा सिंह के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी रही।
प्रशासन का कहना है कि मदरसा बिना मान्यता के चल रहा था, इसलिए नियमानुसार सील किया गया है। वहीं, मदरसा संचालक मौलाना इरशाद अली का दावा है कि मान्यता के लिए आवेदन पहले ही कर दिया गया था और शुल्क भी जमा कर दिया गया था; उन्होंने रिसीविंग भी अधिकारियों को दिखाई।
संचालक के मुताबिक, कुछ समय पहले रुद्रपुर में हुई एक बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह बरनाला और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे, जहाँ मदरसों को रजिस्ट्रेशन के लिए 30 सितंबर तक का समय दिए जाने की बात कही गई थी। इसी के तहत आवेदन किया गया था। उनका कहना है कि फिलहाल मदरसे में पढ़ाई भी नहीं हो रही थी, फिर भी प्रशासन ने सील कर दिया।
एसडीएम रिचा सिंह ने बताया कि इलाके में बिना मान्यता संचालित मदरसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और इसी क्रम में मुंडिया देहात स्थित इस मदरसे पर कार्रवाई हुई।
उत्तराखंड में मदरसा नियमों में बदलाव
उत्तराखंड में हाल में मदरसा शिक्षा से जुड़े नियम बदले हैं। पुराने मदरसा बोर्ड को भंग कर नया “उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण” बनाया गया है और नए नियमों के तहत मदरसों को अब इस प्राधिकरण से मान्यता लेनी अनिवार्य है।
सरकार का रुख है कि जो संस्थान निर्धारित समय तक मान्यता नहीं लेंगे, उनके खिलाफ सीलिंग/बंदी की कार्रवाई की जाएगी। इसी नीति के तहत राज्य के कई जिलों में बिना मान्यता वाले मदरसों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
कानूनी चुनौती
कई मुस्लिम संगठनों ने उत्तराखंड सरकार के इस कदम को अदालत में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि संविधान अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है, इसलिए सरकारी नीति संविधान और नागरिक अधिकारों के विरुद्ध है।
स्थानीय स्तर पर कार्रवाई का विस्तार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाजपुर इलाके में इसी अभियान के तहत चार मदरसों को सील किया गया, जिनमें जामिया हनफिया रजाउत उलूम (बाजपुर), गुलशने इस्लाम (कनोरा), जामिया फातिमा (बाजपुर) और मोइनुल उलूम (गांधीनगर, केलाखेड़ा-बाजपुर) शामिल हैं।












