दिल्ली: 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में दिल्ली पुलिस ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों के लिए मौत की सज़ा की मांग की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” बताते हुए कहा कि अंकित शर्मा का अपहरण कर उनकी बेरहमी से हत्या की गई और आरोपियों ने मौत के बाद भी उन पर हमला जारी रखा।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों का उल्लेख है, जिनमें 18 धारदार हथियार से लगी थीं। अभियोजन ने दलील दी कि यह हत्या 2020 के दिल्ली दंगों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखी जानी चाहिए, जिनमें 53 लोगों की जान गई थी, इसलिए दोषियों को अधिकतम सज़ा दी जानी चाहिए।
वहीं, ताहिर हुसैन के वकील ने मौत की सज़ा का विरोध करते हुए कहा कि यह दंड केवल “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामलों में ही दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष का तर्क था कि ताहिर हुसैन की कोई प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई है, जबकि इस मामले में 11 आरोपियों में से छह को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अभियोजन ताहिर हुसैन के खिलाफ किसी आपराधिक साजिश को साबित नहीं कर सका और किसी हिंसक भीड़ की कार्रवाई के लिए एक व्यक्ति को अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वकीलों ने अदालत को बताया कि हुसैन का जेल में आचरण अच्छा रहा है, उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए और वह अपनी पत्नी व तीन बच्चों के परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सज़ा पर फैसला 31 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया है।
गौरतलब है कि 13 जुलाई को अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। अदालत ने माना था कि सभी दोषी एक सशस्त्र गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे, जिसने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा, आगजनी, लूटपाट और अंकित शर्मा की हत्या की थी।











