दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग (ECI) ने 6 नवंबर को सात राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र जारी किया है। इसमें ASDD सूची में शामिल उन मतदाताओं को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनके नाम SIR के दौरान हटाए गए थे।
चुनाव आयोग का यह पत्र दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नगालैंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया है।
पत्र के मुताबिक, जिन मतदाताओं को पता बदलने के कारण ASDD सूची में शामिल किया गया है, वे अब अपने नए पते की जानकारी देते हुए गणना प्रपत्र जमा कर सकते हैं। बेघर लोगों के मामले में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा मौके पर सत्यापन किया जाना पर्याप्त होगा।
इसके अलावा, जो मतदाता तय समय सीमा के भीतर गणना प्रपत्र जमा नहीं कर पाए थे और इस वजह से ASDD सूची में शामिल हो गए, वे भी अब प्रपत्र जमा कर सकेंगे। इसके साथ उन्हें यह बताना होगा कि वे पहले प्रपत्र क्यों नहीं जमा कर पाए थे।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी मतदाताओं को सत्यापन के बाद उनका पुराना EPIC यानी वोटर आईडी नंबर दोबारा आवंटित किया जाएगा। इन मामलों को जरूरी जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए रखा जाएगा।
आयोग ने इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने को भी कहा है। इसके लिए मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और सार्वजनिक घोषणाओं के जरिए लोगों तक जानकारी पहुंचाने के साथ मतदाताओं को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, 28 अक्टूबर 2026 को दिल्ली SIR मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ASDD सूची में शामिल किए गए मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाना एक गलती थी। कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित या अनुपस्थित/पता नहीं चलने योग्य बताया गया है, उन्हें गणना प्रपत्र या फॉर्म-8 जमा करने का मौका दिया जाना चाहिए।
इस संबंध में याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी ने चुनाव आयोग के नए निर्देशों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम छूटने की समस्या को दूर करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके मुताबिक, पुराने EPIC नंबर दोबारा आवंटित करने का प्रावधान इसलिए अहम है, क्योंकि इससे मतदाता का पहले से मतदाता होने का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, दिल्ली में SIR के पहले चरण में हटाए गए 47.56 लाख मतदाताओं को ASDD सूची में रखा गया था। इनमें से 31.59 लाख लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित और 11.73 लाख को अनुपस्थित या पता नहीं चलने योग्य बताया गया था।











