नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि वह कृषि भवन परिसर में बनी लगभग 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना चाहती है। सरकार का तर्क है कि केंद्रीय सरकारी कार्यालय के परिसर में स्थायी धार्मिक ढांचे का मौजूद रहना धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के अनुकूल नहीं है।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन को तोड़कर नई इमारतें बनाने की योजना है, और इससे यह मस्जिद प्रभावित हो सकती है। सरकार ने अदालत में कहा कि प्रस्तावित निर्माण के लिए मस्जिद को हटाना आवश्यक है।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या ऐसे कोई नियम मौजूद हैं, जो सरकारी परिसरों में धार्मिक स्थलों के निर्माण या उनके बने रहने पर रोक लगाते हों।
जस्टिस अनीश दयाल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या किसी भी धर्म के लोगों को सरकारी परिसर में प्रार्थना के लिए जगह उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल को हटाया जाता है, तो उसके बदले दूसरी जगह देने के लिए क्या नियम हैं। अदालत ने मस्जिद की प्रबंधन समिति को सरकार के जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
दरअसल, वक्फ के तहत अधिसूचित कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति ने सितंबर में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। समिति को आशंका है कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत मस्जिद को गिराया जा सकता है।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने 19 जनवरी को कृषि भवन और शास्त्री भवन की जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की इमारतें 4 और 5 बनाने के लिए टेंडर जारी किया था। इंडियन एक्सप्रेस की फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद को हटाई जाने वाली इमारतों की सूची में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन नई इमारतों के नक्शे में भी मस्जिद की जगह नहीं दिखाई गई थी।
केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय ने 27 अक्टूबर को अदालत में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा कि मस्जिद परियोजना की जमीन पर स्थित है और निर्माण कार्य पूरा करने के लिए इसे हटाना जरूरी है। सरकार ने यह भी कहा कि परियोजना की जमीन का कोई हिस्सा धार्मिक स्थल के लिए आरक्षित करना तय मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं होगा।
सरकार के मुताबिक, 1940 में हुए एक समझौते के तहत प्रशासन ने जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति को सीमित उद्देश्य से इस मस्जिद के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।
दूसरी ओर, मस्जिद की प्रबंधन समिति का कहना है कि आजादी के बाद से कई दशकों तक कृषि भवन और आसपास के सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी यहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इस कारण यह मस्जिद सरकारी कर्मचारियों के लिए नमाज अदा करने की एक स्थापित जगह बन गई है।
समिति ने अदालत से मांग की है कि CPWD और NDMC को मस्जिद गिराने या हटाने से रोका जाए। साथ ही, यदि मौजूदा स्थान पर मस्जिद को रखना संभव नहीं है, तो उसके पास ही पर्याप्त जगह पर नमाज की वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा है कि जमीन का मालिक होने के नाते उसे मस्जिद के लिए कृषि भवन या केंद्रीय सचिवालय परिसर में दूसरी जगह देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सरकार ने यह भी दलील दी कि इंडिया गेट के पास करीब दो किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्ता गंज मौजूद है, जहां लोग नमाज पढ़ सकते हैं।











