उत्तराखंड के रुद्रपुर में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम के दौरान मदरसों को बंद करने के खिलाफ कथित तौर पर बयान देने के मामले में पुलिस ने मुफ्ती मुजीब अहमद अज़हरी को गिरफ्तार किया है। मुजीब उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के दरियाल टांडा के रहने वाले हैं।
पुलिस के मुताबिक, मामला 26 अगस्त को रुद्रपुर के त्रिशूल चौक के पास आयोजित एक कार्यक्रम का है। कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें मुजीब कथित तौर पर सरकार की ओर से मदरसों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाते और मदरसों को बंद करने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते नजर आए।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। पूछताछ के बाद 29 अगस्त को मुजीब को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया।
उन्होंने वीडियो में कहा था “मदरसों के बारे में ये फैसला आप मत करो, इसलिए की हम भी तो अपने मुसलमानों तालीम देते हैं किसी पर ज़ुल्म न करना है, झूठ नहीं बोलना है, चोरी नहीं करनी है, ज़्यादती नहीं करनी है। कोई भी ज़िद नहीं करनी है। और याद रखना अगर मदरसे बंद कर दिए तो फिर देखना आप, ये मुसलमान क्या हाल करेंगे। ये किसी की सुनने वाले नहीं हैं ये तो अपने उलेमा की इज़्ज़त करते हैं जो सुन लेते हैं। वरना आज भी इनके अंदर वही जज़्बा है जो सहाबा के अंदर था जब जंगे बद्र हुई थी। और नबी जब परेशान हुए थे तो एक सहाबी-ए-रसूल खड़े हुए एयर खड़े होकर के कहा – उठों मेरे साथ उठकर अर्ज की, ऐ सरबरे आलम क़ौमें मूसा की तरह कह देने वाले हम नहीं। नबी का हुक्म हो तो कूद जाएँ हम समंदर में भी, जहाँ को मदद कर दें।”
मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी को भी समाज में डर पैदा करने, दूसरों को धमकाने या कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। धामी ने कथित बयान को एक ऐसी मानसिकता से जोड़ा जो संविधान का सम्मान नहीं करती।
पुलिस अब कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच कर रही है। मंच लगाने की अनुमति ली गई थी या नहीं और कार्यक्रम में कौन-कौन लोग मौजूद थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। आयोजन समिति से जुड़े कुछ लोगों से भी पूछताछ की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को पुलिस ने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। इसका उद्देश्य वीडियो की वास्तविकता और उसमें कही गई बातों की पुष्टि करना है।
हालांकि, मुफ्ती मुजीब अहमद अज़हरी ने अपने बयान की अलग व्याख्या की है। ख़बरों के मुताबिक, उनका कहना है कि उन्होंने मदरसों और उनकी जमीन को लेकर बात की थी, लेकिन सरकार को निशाना नहीं बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में सरकार की ओर से कथित तौर पर अनधिकृत मदरसों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई और राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। मामले की जांच अभी जारी है।












