चंडीगढ़ की एक अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कथित भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार हैदराबाद निवासी हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
बार एंड बेंच के मुताबिक़, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनाली सिंह ने 27 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि यदि उसे जमानत दी जाती है तो इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलने की आशंका है।
हसन सिद्दीकी को 25 अप्रैल को चंडीगढ़ पुलिस ने वकील सतिंदर सिंह की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने X पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया था कि उसमें दिख रहा व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और उनके बारे में भ्रामक तथा आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बाद में फैक्ट-चेक में इस दावे को गलत बताया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी सेहत और जेल में रखे जाने की परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई। कुछ पोस्टों में दावा किया गया था कि वह गंभीर अग्नाशय (पैंक्रियाटाइटिस) की बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित इलाज की जरूरत है।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सिद्दीकी जेल में बेहोश हो गए थे और उनकी देखभाल में लापरवाही बरती गई। जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी दो महीने से अधिक समय से जेल में है और जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा तीन वर्ष है। वहीं, पुलिस ने कहा कि आरोपी की पोस्ट भड़काऊ, आपत्तिजनक और सांप्रदायिक तनाव व कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की क्षमता रखती है।
अदालत ने माना कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाना जमानत देने का आधार नहीं है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले मई में आरोपी की पहली जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी थी। वहीं, इसी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मई में शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।











