महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के तुलजापुर में 18 वर्षीय बी.कॉम छात्र समीर जब्बार पटेल की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। लड़की का पीछा करने और उसे परेशान करने के आरोपों के बाद हुई इस घटना में पुलिस ने तुलजापुर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष और स्थानीय बीजेपी नेता संतोष कदम तथा संजय विलास जाधव को गिरफ्तार किया है। दोनों को अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।
समीर तुलजाभवानी महाविद्यालय में बी.कॉम प्रथम वर्ष का छात्र था। पुलिस के मुताबिक, घटना 3 नवंबर की शाम से 4 नवंबर की सुबह के बीच हुई। पुलिस ने बताया कि कदम ने करीब तीन महीने पहले समीर पर अपने रिश्तेदार की बेटी का पीछा करने और उसे परेशान करने का आरोप लगाया था। इस मामले में उसने समीर और उसके माता-पिता से भी बात की थी। ये आरोप हैं और मामले की जांच जारी है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, समीर की मां ने FIR में आरोप लगाया है कि 3 नवंबर की रात कदम के घर पर उनके बेटे के साथ बांस और बेल्ट से मारपीट की गई। परिवार ने समीर को वहां से ले जाने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि कुछ लोगों ने उसे अपने साथ दूसरी जगह ले गए। मां ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार को धमकाया गया और कुछ समय तक घर से निकलने नहीं दिया गया।
पुलिस के अनुसार, बाद में समीर गंभीर हालत में भारतिभूवा मठ के पास पार्किंग क्षेत्र में मिला। परिवार उसे सरकारी अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना में समीर के रिश्तेदार अरबाज अफसर सय्यद भी घायल हुए। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, समीर की मां की शिकायत पर पुलिस ने हत्या और अपहरण समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था।
मकतूब की रिपोर्ट में बताया गया है कि अरबाज ने भी आरोप लगाया कि उन्हें जबरन एक खेत में ले जाकर पीटा गया और उनका मोबाइल फोन जांचने के लिए पासवर्ड मांगा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनसे 10 हजार रुपये भी छीन लिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच का नतीजा सामने आना बाकी है।
संतोष कदम पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे और नवंबर 2025 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। द इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस के हवाले से बताया कि कदम और जाधव को गिरफ्तार कर सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, FIR में नामजद अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है कि एक छात्र पर लगाए गए आरोपों की जांच और कानूनी कार्रवाई के बजाय उसके साथ कथित तौर पर हिंसा की गई। किसी भी आरोप की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी व्यक्ति या समूह को नहीं है। पुलिस जांच में घटना की पूरी परिस्थितियां और सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होनी बाकी है।












