नई दिल्ली, 9 जून 2026: केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शहीद उप-निरीक्षक (जीडी) मोहम्मद इम्तियाज (Mohammad Imtiaz Shaheed) को उनकी अदम्य वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया है। 8 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित Defence Investiture Ceremony में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान शहीद की पत्नी शहनाज आजिमा को सौंपा।
शहीद मोहम्मद इम्तियाज की वीरता की कहानी (ऑपरेशन सिंदूर)
शहीद BSF उप-निरीक्षक मोहम्मद इम्तियाज (Mohammad Imtiaz Shaheed) 7वीं बटालियन से थे और 10 मई 2025 को जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर के बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) खरकोला पर तैनात थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी ड्रोनों और मोर्टार गोलाबारी का सामना करते हुए उन्होंने लाइट मशीन गन (LMG) से एक ड्रोन को नष्ट कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपने साथी कांस्टेबल दीपक चिंगाखम के साथ दुश्मन का मुंहतोड़ जवाब दिया।
आखिरी सांस तक उन्होंने जवानों को प्रेरित किया – “जवानों, आज खत्म कर दो इनको।” इसी घटना में शहीद कांस्टेबल (जीडी) दीपक चिंगाखम को भी मरणोपरांत वीर चक्र प्रदान किया गया।
शहीद इम्तियाज का परिवार
शहीद मोहम्मद इम्तियाज (Mohammad Imtiaz Shaheed) बिहार के सारण जिले (छपरा) के नारायणपुर गांव के रहने वाले थे। उनकी पत्नी शहनाज आजिमा, बेटा इमरान और पूरा परिवार आज भी उनकी शहादत पर गर्व करता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।
वीर चक्र का महत्व
वीर चक्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन जवानों को दिया जाता है जो देश की सीमा की रक्षा में असाधारण साहस दिखाते हैं। इस पर बीएसएफ ने कहा, “शहीद इम्तियाज का बलिदान देश के लिए अमिट उदाहरण बनेगा।”












