Opinion

IAS बनने के सपनों को जहां मिलता है मुकाम: जामिया मिल्लिया इस्लामिया की RCA की प्रेरक यात्रा।

Spread the love

कुछ इमारतें केवल ईंट, पत्थर और दीवारों से नहीं बनतीं। उनकी असली पहचान उन सपनों से बनती है जो उनके भीतर जन्म लेते हैं, उन संघर्षों से बनती है जो वहां खामोशी से लड़े जाते हैं और उन सफलताओं से बनती है जिनकी खुशी किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर पूरे परिवार, समाज और देश तक पहुंचती है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी यानी RCA ऐसी ही एक जगह है।

यहां आने वाला प्रत्येक विद्यार्थी केवल एक प्रवेश परीक्षा पास करके दाखिल नहीं होता। वह अपने साथ अपने माता-पिता की उम्मीदें, अपने परिवार के सपने, अपने शहर और गांव की यादें और स्वयं को साबित करने का एक मजबूत संकल्प लेकर आता है। किसी का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का होता है, किसी का पुलिस सेवा में, किसी का विदेश सेवा में और किसी का दूसरी प्रतिष्ठित सरकारी सेवा के माध्यम से देश की सेवा करने का। इन सभी सपनों के बीच एक नाम उन्हें सहारा देता है, जामिया मिल्लिया इस्लामिया।

एक सोच, जो अवसर में बदल गई

जामिया में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने की यह यात्रा अचानक शुरू नहीं हुई। विश्वविद्यालय का सेंटर फॉर कोचिंग एंड करियर प्लानिंग वर्ष 1985 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य शैक्षिक रूप से पिछड़े और अवसरों से वंचित वर्गों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और राष्ट्रीय विकास में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना था।

इसी सोच को और मजबूत स्वरूप देते हुए वर्ष 2010 में रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी की स्थापना की गई। जामिया के आधिकारिक विवरण के अनुसार RCA को सेंटर फॉर कोचिंग एंड करियर प्लानिंग के अंतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से विकसित किया गया। इसका विशेष ध्यान धार्मिक अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं सहित ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं पर रहा, जिन्हें अवसरों और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

यही वह बात है जो RCA को सामान्य कोचिंग व्यवस्था से अलग करती है।

यह केवल यह नहीं पूछती कि आपके पास कितने संसाधन हैं; यह उस प्रतिभा को पहचानने का प्रयास करती है जो संसाधनों की कमी के पीछे कहीं दब गई है।

जिन लोगों ने एक सपने को संस्था का रूप दिया

किसी बड़े संस्थान की सफलता के पीछे केवल वर्तमान में दिखाई देने वाले चेहरे नहीं होते। उसके पीछे वे लोग भी होते हैं जिन्होंने वर्षों पहले एक विचार देखा, उसके लिए संसाधन जुटाए और उस विचार को जमीन पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए। RCA के इतिहास में ऐसा ही एक प्रमुख नाम जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व कुलपति नजीब जंग का है।

जामिया के अपने आधिकारिक अभिलेख बताते हैं कि उनके कुलपति कार्यकाल में RCA को स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास किए गए। वर्ष 2011 में RCA की आधारशिला भी नजीब जंग ने रखी थी। बाद में 28 मार्च 2014 को, दिल्ली के उपराज्यपाल और जामिया के पूर्व कुलपति के रूप में, उन्होंने RCA के अकादमिक भवन का उद्घाटन किया।

उस अवसर पर तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति प्रो. एस. एम. साजिद ने नजीब जंग द्वारा जामिया में विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों का उल्लेख किया था। वहीं सेंटर फॉर कोचिंग एंड करियर प्लानिंग के तत्कालीन मानद निदेशक प्रो. अनीसुर रहमान ने भी RCA के प्रति नजीब जंग की दूरदृष्टि और विशेष रुचि को रेखांकित करते हुए कहा था कि यह परियोजना उनके नेतृत्व में मूर्त रूप ले सकी।

इस यात्रा में विश्वविद्यालय प्रशासन, सेंटर के निदेशकों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विशेषज्ञों और बाद की पीढ़ियों के मार्गदर्शकों का योगदान भी उसी कहानी का हिस्सा है।

असल में किसी संस्था को बनाने वाला कोई एक व्यक्ति नहीं होता। कोई उसकी कल्पना करता है, कोई संसाधन जुटाता है, कोई इमारत खड़ी करता है, कोई पुस्तकालय को समृद्ध करता है, कोई कक्षाओं में पढ़ाता है और कोई निराश विद्यार्थी से कहता है—

“एक बार और कोशिश करो।”

शायद RCA की सफलता में इन सभी अनदेखे हाथों का भी उतना ही हिस्सा है जितना किसी परिणाम सूची में दिखाई देने वाले नामों का।

जब किसी साधारण घर का सपना असाधारण बन जाता है। कल्पना कीजिए उस विद्यार्थी की, जो देश के किसी छोटे शहर या दूर-दराज के इलाके से दिल्ली आता है।

घर से निकलते समय मां शायद उसके बैग में कुछ खाने का सामान रखते हुए कहती होगी, “अपना ध्यान रखना।”

पिता शायद ज्यादा कुछ न कहें, लेकिन उनकी आंखों में एक उम्मीद जरूर हो कि जिस मंजिल तक वे स्वयं नहीं पहुंच पाए, शायद उनका बेटा या बेटी वहां तक पहुंचे।

दिल्ली जैसे महानगर में सिविल सेवा की तैयारी आसान नहीं है। रहने का खर्च, किताबें, मार्गदर्शन, परीक्षा सामग्री और एक ऐसा वातावरण जहां विद्यार्थी लगातार पढ़ सके, इन सबकी व्यवस्था कई परिवारों की आर्थिक क्षमता से बाहर हो सकती है।

ऐसे में RCA केवल एक अकादमी नहीं रह जाती।

वह एक सहारा बन जाती है।

वह विद्यार्थी को यह एहसास कराती है कि मंजिल दूर जरूर है, लेकिन परिस्थितियां उसकी क्षमता का अंतिम फैसला नहीं करेंगी।

यहां केवल पढ़ाया नहीं जाता, तैयार किया जाता है सिविल सेवा की परीक्षा केवल किताबें पढ़ लेने की परीक्षा नहीं है। यह धैर्य, अनुशासन, समझ, लेखन क्षमता, निर्णय क्षमता और लंबे समय तक स्वयं पर विश्वास बनाए रखने की परीक्षा भी है।

RCA में विद्यार्थियों का चयन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। इसके बाद कक्षा शिक्षण के साथ समय-समय पर परीक्षा और मूल्यांकन की व्यवस्था की जाती है। विशेषज्ञ मार्गदर्शन, टेस्ट सीरीज, मुख्य परीक्षा की तैयारी, व्यक्तित्व विकास और साक्षात्कार की तैयारी इसके प्रशिक्षण का हिस्सा रहे हैं।

समय के साथ RCA ने अपनी व्यवस्था को और व्यापक बनाया। जामिया की 2024 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रशिक्षण में प्रारंभिक परीक्षा से लेकर मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तक 500 घंटे से अधिक की कक्षाएं, विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के विशेष व्याख्यान, समूह चर्चा, टेस्ट सीरीज और मॉक इंटरव्यू शामिल रहे हैं। इसके साथ 24 घंटे पुस्तकालय, वाई-फाई और छात्रावास जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

लेकिन इन सुविधाओं के पीछे जो सबसे महत्वपूर्ण चीज है, उसे शायद किसी आंकड़े में नहीं मापा जा सकता, पढ़ने का माहौल।

एक विद्यार्थी दूसरे को पढ़ता देखकर प्रेरित होता है। कोई उत्तर लिख रहा है, कोई अखबार के महत्वपूर्ण हिस्सों पर नोट बना रहा है, कोई पिछले वर्ष के प्रश्नों को समझ रहा है और कोई असफल प्रयास के बाद स्वयं को दोबारा तैयार कर रहा है।

RCA की असली कहानी शायद इन्हीं शांत कमरों में लिखी जाती है। असफलता के बाद भी बुझने नहीं दिया जाता सपना। सिविल सेवा परीक्षा की सबसे कठिन सच्चाइयों में से एक यह है कि यहां मेहनत करने वाला हर व्यक्ति पहले प्रयास में सफल नहीं होता। कभी प्रारंभिक परीक्षा में कुछ अंक कम रह जाते हैं। कभी मुख्य परीक्षा तक पहुंचकर यात्रा रुक जाती है। कभी साक्षात्कार तक पहुंचने के बाद अंतिम सूची में नाम नहीं आता।

ऐसे क्षणों में एक विद्यार्थी के लिए दुनिया बहुत छोटी लगने लगती है। महीनों और वर्षों की मेहनत कुछ अंकों के अंतर से अधूरी रह जाए तो दर्द केवल विद्यार्थी का नहीं होता। उसके साथ प्रतीक्षा कर रहा पूरा परिवार उस दर्द को महसूस करता है।

लेकिन शायद महान संस्थानों की पहचान केवल सफल लोगों से नहीं होती। उनकी पहचान इस बात से भी होती है कि वे असफलता के बाद अपने विद्यार्थियों को फिर से खड़े होने का कितना साहस देते हैं।RCA का वातावरण अनेक युवाओं के लिए यही संदेश बन जाता है। एक परीक्षा में असफल होना, जीवन में असफल होना नहीं है।

जब परिणाम आता है और जामिया मुस्कुराती है। फिर एक दिन संघ लोक सेवा आयोग का परिणाम आता है।

कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन पर रोल नंबर खोजे जाते हैं। दिल की धड़कन तेज होती है। सूची में नाम दिखाई देता है और कुछ क्षणों के लिए शायद विश्वास ही नहीं होता।

फिर फोन घर जाता है।

दूसरी तरफ मां की आवाज होती है।

कहीं पिता की आंखें नम होती हैं।

कहीं भाई-बहन पूरे मोहल्ले को खबर देते हैं।

और उसी क्षण एक विद्यार्थी की कई वर्षों की मेहनत पूरे परिवार के उत्सव में बदल जाती है।

RCA ने वर्षों में ऐसी अनेक कहानियां देखी हैं। इनमें UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली श्रुति शर्मा, 2018 में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले जुनैद अहमद और 2023 में नौवां स्थान प्राप्त करने वाली नौशीन जैसे नाम RCA की पहचान से जुड़ चुके हैं।

ये केवल नाम नहीं हैं। इनके पीछे यह संदेश छिपा है कि सही अवसर, सही वातावरण और कठिन मेहनत एक सामान्य विद्यार्थी को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शीर्ष तक पहुंचा सकती है।

आंकड़े, जो RCA की यात्रा की गवाही देते हैं

RCA की सफलता को केवल कुछ चर्चित नामों तक सीमित कर देना भी उसके पूरे योगदान के साथ न्याय नहीं होगा। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि यह सफलता किसी एक वर्ष की घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रही यात्रा है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में RCA के 23 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इनमें 9 महिलाएं थीं और सबसे बड़ी उपलब्धि श्रुति शर्मा का अखिल भारतीय प्रथम स्थान था। उस समय जामिया ने यह भी बताया था कि RCA से तब तक लगभग 270 अभ्यर्थी UPSC के माध्यम से सफल हो चुके थे, जबकि 403 अभ्यर्थियों का चयन राज्य लोक सेवा आयोगों, RBI, CAPF और अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में हो चुका था।

सिविल सेवा परीक्षा 2022 में RCA की आधिकारिक चयन सूची में 23 मुख्य चयनित अभ्यर्थी दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त 4 अभ्यर्थियों के नाम UPSC की आरक्षित सूची में दर्ज किए गए। इस वर्ष RCA के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं में अजमेरा संकेत कुमार ने 35वीं रैंक और दिव्यांशी सिंगला ने 95वीं रैंक प्राप्त की।

इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा 2023 में प्रदर्शन और बेहतर हुआ। RCA के 31 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। इनमें 11 महिलाएं थीं। कुल 71 RCA अभ्यर्थी साक्षात्कार तक पहुंचे थे और इनमें से 31 अंतिम रूप से सफल रहे। सबसे बड़ी उपलब्धि नौशीन की अखिल भारतीय 9वीं रैंक रही। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 8 अधिक थी।

सिविल सेवा परीक्षा 2024 में RCA के 32 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इस बार RCA के 78 विद्यार्थी साक्षात्कार तक पहुंचे थे, जिनमें से 32 अंतिम सूची में जगह बनाने में सफल रहे। चयनित अभ्यर्थियों में 12 महिलाएं थीं। अल्फ्रेड थॉमस ने 33वीं, इरम चौधरी ने 40वीं और रुचिका झा ने 51वीं रैंक प्राप्त की।

इसी आधिकारिक विवरण में जामिया ने बताया कि 2010-11 से 2024 तक RCA ने लगभग 300 सिविल सेवक तैयार किए थे, जिनमें IAS, IPS और IFS जैसी सेवाओं के अधिकारी शामिल थे। इसके अतिरिक्त 300 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन CAPF, IB, RBI ग्रेड-B, PCS, बैंक और विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सेवाओं में हुआ।

और फिर आया सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम।

RCA के 38 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की, जिनमें 15 महिलाएं थीं। विशेष रूप से उल्लेखनीय बात यह रही कि RCA के 4 अभ्यर्थियों ने देश की शीर्ष 50 रैंकों में स्थान बनाया—7वीं, 14वीं, 24वीं और 29वीं अखिल भारतीय रैंक।

2021 में 23, 2022 में 23, 2023 में 31, 2024 में 32 और 2025 में 38 सफल अभ्यर्थी—

ये संख्याएं केवल बढ़ते हुए आंकड़े नहीं हैं।

इनके पीछे वर्षों की पढ़ाई है।

इनके पीछे सैकड़ों मॉक टेस्ट हैं।

इनके पीछे निराशा से भरी रातें हैं।

इनके पीछे परिवारों की प्रतीक्षा है।

और इनके पीछे RCA की वह व्यवस्था है जो हर नए बैच से फिर वही सवाल पूछती है—

“अगली सफलता की कहानी कौन लिखेगा?”

RCA की सफलता का सबसे सुंदर पक्ष।

किसी प्रतिष्ठित निजी कोचिंग संस्थान से अच्छे परिणाम आना निश्चित रूप से उपलब्धि है, लेकिन RCA की कहानी कुछ अलग है।

यहां सफलता का अर्थ केवल किसी विद्यार्थी का अधिकारी बन जाना नहीं है।

यह सामाजिक गतिशीलता की कहानी भी है।

जब सामान्य आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाला विद्यार्थी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनता है तो केवल उसकी नौकरी नहीं बदलती, उस परिवार की अगली पीढ़ी के सपने बदल जाते हैं।

किसी गांव की एक लड़की का अधिकारी बनना उस गांव की दूसरी लड़कियों से कहता है—

“तुम भी कर सकती हो।”

किसी सीमित साधनों वाले परिवार के युवक का चयन पड़ोस के बच्चों को बताता है—

“तुम्हारे घर का आकार तुम्हारे सपनों का आकार तय नहीं करता।”

शायद RCA की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है।

इसने केवल अधिकारी तैयार नहीं किए, इसने विश्वास पैदा किया है।

महिलाओं के सपनों को भी मिली नई उड़ान

RCA की व्यवस्था में महिलाओं को स्थान देना इसके सामाजिक उद्देश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

वर्षवार परिणामों को देखें तो यह तस्वीर और स्पष्ट दिखाई देती है। 2021 में 23 सफल अभ्यर्थियों में 9 महिलाएं थीं, 2023 में 31 में से 11, 2024 में 32 में से 12 और 2025 में 38 सफल अभ्यर्थियों में 15 महिलाएं थीं।

जब किसी बेटी का चयन सिविल सेवा में होता है तो उसकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहती। वह समाज में उन पुरानी धारणाओं को भी चुनौती देती है जिनमें बेटियों के सपनों की सीमाएं तय कर दी जाती थीं।

जामिया के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि उसकी छांव से निकलकर बेटियां देश के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बन रही हैं।

जामिया की परंपरा और RCA

जामिया मिल्लिया इस्लामिया का इतिहास हमेशा शिक्षा को समाज से जोड़ने का इतिहास रहा है।

शिक्षा यहां केवल व्यक्तिगत उन्नति का माध्यम नहीं रही; उसके साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी रही है।

RCA इसी विचार को आधुनिक प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में आगे बढ़ाती दिखाई देती है।

इस अकादमी का घोषित उद्देश्य भी केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है। जामिया RCA को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उत्कृष्टता का केंद्र बनाने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करने की बात करता है।

और शायद यही RCA की कहानी को सबसे अधिक अर्थपूर्ण बनाता है।

यहां तैयारी नौकरी पाने के लिए शुरू होती है, लेकिन उसकी अंतिम मंजिल देश की सेवा हो सकती है।

हर दौर में कुछ लोग इस मशाल को आगे बढ़ाते रहे

नजीब जंग के समय जिस सोच ने संस्थागत रूप लिया, उसे बाद के वर्षों में अलग-अलग कुलपतियों, रजिस्ट्रारों, RCA के निदेशकों, प्रोफेसर-इंचार्ज, शिक्षकों और कर्मचारियों ने आगे बढ़ाया।

हाल के वर्षों में भी यह सिलसिला जारी रहा है। 2024 के परिणामों पर जामिया ने RCA की प्रोफेसर-इंचार्ज प्रो. समीना बानो के व्यक्तिगत मार्गदर्शन की भूमिका का विशेष उल्लेख किया। 2025 के परिणामों के बाद भी विश्वविद्यालय ने उनके नेतृत्व में शुरू किए गए अकादमिक और मार्गदर्शन संबंधी प्रयासों की सराहना की। वर्तमान कुलपति प्रो. मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने भी RCA को प्रशासनिक सहयोग देने और इसकी सफलता को जामिया की राष्ट्रसेवा की प्रतिबद्धता से जोड़ा।

यह उल्लेख इसलिए आवश्यक है क्योंकि किसी संस्था का इतिहास केवल उसकी स्थापना की तारीख से नहीं लिखा जाता।

उसका इतिहास हर उस व्यक्ति से बनता है जो उसे अपने समय में पहले से थोड़ा बेहतर छोड़कर जाता है।

RCA कोई इमारत नहीं, एक उम्मीद है

किसी शाम RCA के आसपास से गुजरते हुए शायद हमें केवल एक अकादमिक भवन दिखाई दे।

लेकिन उसकी खिड़कियों के पीछे बहुत कुछ चल रहा होता है।

किसी कमरे में एक विद्यार्थी अपने नोट्स दोहरा रहा होगा।

किसी ने घर पर कई दिनों से बात नहीं की होगी क्योंकि परीक्षा निकट होगी।

किसी के सामने यह उसका अंतिम प्रयास होगा।

कोई पिछले परिणाम की निराशा भूलकर नई शुरुआत कर रहा होगा।

और कोई शायद उसी कुर्सी पर बैठा होगा, जहां कभी बैठने वाला विद्यार्थी आज देश के किसी जिले में प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रहा है।

यही निरंतरता किसी संस्थान को महान बनाती है।

एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को यह विश्वास देकर जाती है कि—

“हम कर सके, तो तुम भी कर सकते हो।”

हर चयन के पीछे जामिया का भी एक हिस्सा

जब RCA का कोई विद्यार्थी अधिकारी बनकर निकलता है, उसके साथ जामिया का एक छोटा-सा हिस्सा भी देश के किसी कोने तक पहुंचता है।

कभी वह जिलाधिकारी के कार्यालय तक पहुंचता है।

कभी पुलिस प्रशासन में।

कभी राजस्व सेवा में।

कभी विदेश सेवा में।

कभी किसी राज्य की प्रशासनिक सेवा में।

एक विश्वविद्यालय के लिए इससे सुंदर उपलब्धि क्या होगी कि उसकी कक्षाओं और पुस्तकालयों में पढ़े युवा आगे चलकर देश के नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने वाली व्यवस्था का हिस्सा बनें।

इसलिए RCA के परिणाम पर केवल सफल विद्यार्थी और उनका परिवार ही गर्व नहीं करता।

जामिया भी गर्व करती है।

और जामिया से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति गर्व करता है।

अंततः…

RCA की कहानी रैंक की कहानी जरूर है, लेकिन केवल रैंक की कहानी नहीं है।

यह अवसर की कहानी है।

यह संघर्ष की कहानी है।

यह उन माता-पिताओं की कहानी है जिन्होंने अपनी जरूरतें पीछे रखकर अपने बच्चों के सपनों को आगे रखा।

यह उन युवाओं की कहानी है जिन्होंने असफलता के बाद भी किताब बंद नहीं की।

यह उन बेटियों की कहानी है जिन्होंने सामाजिक सीमाओं से आगे बढ़कर अपनी पहचान बनाई।

यह उन शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भी कहानी है जिन्होंने वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर किसी और के सपने को पूरा करने में अपनी भूमिका निभाई।

और यह उन दूरदर्शी लोगों की कहानी भी है जिन्होंने वर्षों पहले यह विश्वास किया कि प्रतिभा को अवसर दिया जाए तो जामिया की एक अकादमी से निकलने वाला विद्यार्थी एक दिन देश की प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी जगह बना सकता है।

और सबसे बढ़कर—

यह उस विश्वास की कहानी है कि प्रतिभा किसी अमीर या गरीब घर की मोहताज नहीं होती; उसे केवल सही अवसर और सही दिशा की जरूरत होती है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की RCA वर्षों से इसी अवसर और दिशा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।

आज जब RCA से निकले सफल अभ्यर्थी देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशासन और सार्वजनिक सेवा की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, तब जामिया के लिए यह केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि गर्व का विषय है।

शायद भविष्य में RCA की किसी मेज पर बैठा कोई विद्यार्थी आज यह लेख पढ़ रहा हो। शायद वह अभी अपनी क्षमताओं को लेकर असमंजस में हो। शायद कई बार असफल हो चुका हो।

उस विद्यार्थी से बस इतना कहना है—

अपना सपना मत छोड़ना।

क्योंकि जामिया की इस धरती ने बार-बार साबित किया है कि साधारण परिस्थितियों में जन्मे सपने भी असाधारण मुकाम तक पहुंच सकते हैं।

और इसी कारण RCA के लिए शायद इससे सुंदर परिचय कोई दूसरा नहीं हो सकता—

“यह वह जगह है, जहां संघर्ष उम्मीद में बदलता है, उम्मीद मेहनत में बदलती है और एक दिन मेहनत मुकाम में बदल जाती है।” जहां सपनों को मिलता है मुकाम, वह है जामिया मिल्लिया इस्लामिया की RCA

(यह लेख डॉ. मोहम्मद सैफी अनवार की अनुमति से उनके आधिकारिक फेसबुक पेज से प्रकाशित किया गया है। हमारी टीम ने लेख की मूल सामग्री में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया है। डॉ. अनवार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययन विभाग में विजिटिंग फैकल्टी हैं तथा पेशे से एक शिक्षक, लेखक और शोधकर्ता हैं।)

Dr. Mohd. Saifi Anwar holds B.Com., M.Com., B.Ed., Ph.D. (Commerce), UGC-NET, and LL.B. He is a Visiting Faculty at the Department of Commerce & Business Studies, Jamia Millia Islamia, and a Counsellor at the Centre for Distance and Online Education…

Related Posts

1 of 3

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *